भू माफियायों से ऐतिहासिक चर्च को बचाने की अपील
प्रयागराज कानपुर रोड स्थित मकान संख्या 8 पर चर्च संपत्ति विवाद एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक नजूल संपत्ति है, जो लंबे समय से कानूनी और न्यायिक चर्चाओं का विषय रही है। इस संपत्ति में छह किरायेदारों के साथ साथ एक चर्च भी स्थापित है।
उल्लेखनीय है कि इस चर्च का इतिहास लगभग 80 वर्षों पुराना है। यहाँ पादरी ग्लेडविन मसीह चरण निवास करते हैं और उनके नेतृत्व में इंडियन नेशनल चर्च की प्रार्थना सभाएँ निरंतर आयोजित होती रही हैं। इस परिसर की खाली भूमि पर समय समय पर प्रार्थना सभाएँ, भंडारे और सर्व धर्म सभाएँ भी होती रही हैं, जिनमें विभिन्न धर्मों के लोग एकजुट होकर भाईचारे का संदेश देते हैं।
परंतु हाल के दिनों में इस भूमि पर कब्ज़ा करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता मधुप अग्रवाल के नेतृत्व में कुछ वकीलों की टीम ने कैलाश जायसवाल और राम लली के नाम पर फर्जी सेल डीड दिखाकर इस चर्च की खाली ज़मीन पर कब्ज़ा करने का प्रयास कर रही है और कुछ सरकारी लोगों से मिलकर लीज़ री-न्यूवल कराने का षड्यंत्र रच रहे हैं । जबकि न तो कोई वैध सेल डीड हुई है और न ही कोई वास्तविक कब्ज़ा, फिर भी ये लोग स्वयं को मालिक बताने लगे हैं।
चर्च अनुयायियों का आरोप है कि ये अधिवक्ता फर्जी पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर पादरी चरण और चर्च के लोगों को डराते धमकाते हैं और कहते हैं – “हम अधिवक्ता हैं, हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता। तुम लोग यह जगह छोड़कर चले जाओ।”
इस विवाद को लेकर कस्टोडियन ऑफ चर्च एस्सेट्स ट्रस्ट के सदस्य लिली भावना कॉलर एन बी मोंट्रोज़, गाज़ियाबाद से डॉ राहुल उठवाल, लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार संजोग वाल्टर और सी आर विलियम, मिर्ज़ापुर से जैसमिन लाल, जयवंत लाल, रीना विंटर , प्रयागराज की सुदीपा मित्रा, धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, अबुल कलाम राइन, ठाकुर शिव सागर सिंह, निशांत अग्रवाल, दिल्ली से विवेक मोंट्रोज़ और डॉ रमा मोंट्रोज़ आदि खुलकर विरोध कर रही हैं। इनके साथ ही कई सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार भी इस आंदोलन में शामिल हैं,
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए चर्च अनुयायियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह इस ऐतिहासिक स्थल को भू माफियाओं से सुरक्षित रखे और पादरी चरण व उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करे। साथ ही मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, गृह सचिव एवं पुलिस महा निरीक्षक से तत्काल संज्ञान लेकर इस सम्पत्ति की जाँच कराने की माँग की गई है।
चर्च अनुयायियों ने सरकार से यह भी माँग की है कि इस भूमि को उन्हें लीज़ अथवा फ्रीहोल्ड में प्रदान किया जाए, ताकि यह ऐतिहासिक चर्च निरंतर चलता रहे और आने वाली पीढ़ियाँ भी इसकी आध्यात्मिक धारा से जुड़ी रहें।

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